गोण्डा- शासन द्वारा रोक के बाद भी तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा नगर पालिका परिषद में अनियमित तरीके से अपने रिश्तेदारों के साथ ही अन्य 59 लोगों की अनियमित तरीके से नियुक्तियां कर दी गयीं। मामला अदालत में पहुंचा जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्तियों को निरस्त करते हुए वेतन भुगतान की रिकवरी का आदे जारी किया गया, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा भुगतान का खेल खेला जाता रहा। अदालत व शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए नियुक्त किए गए सभी 59 कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जाता रहा है।

अब इस मामले में 30 करोड़ से अधिक की धनराशि का गोलमाल उजागर हुआ है। प्रकरण नगर पालिका परिषद गोण्डा का है, जहां 24 जून 2014 के पत्रांक संख्या 569 दिनांक 27.11.2014, पत्रांक 586 दिनांक 8.12.2014 अध्यक्ष /अपर जिलाधिकारी गोण्डा के आदेश पत्रांक 331 दिनांक 5 मार्च 2015 द्वारा शासनादेश दिनांक 6.12.1991 नियुक्ति पर रोक व निदेशक स्थानीय… (शेष खबर विज्ञापन के बाद)



……. निकाय के आदेश दिनांक 6 मार्च 2019 के अनुपालन में 59 कर्मचारियों का वेतन रोके जाने तथा रिकवरी कराए जाने के संबंध में यह कहा गया कि शासन द्वारा समस्त नगर पालिकाओं में आदेश दिनांक 6.12.1991 के बाद दैनिक अथवा किसी भी प्रकार की नियुक्ति पर रोक लगी थी, किंतु तत्कालीन अध्यक्ष कमरुद्दीन द्वारा शासनादेश का खुला उल्लंघन कर अपने रिश्तेदारों सहित अन्य लोगों की अनियमितता पूर्वक नियुक्तियां की गईं।

जिसको माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सचिव नगर विकास उत्तर प्रदेश शासन के आदेश दिनांक 24.6.2014 के अनुपालन में अधिशासी अधिकारी द्वारा कार्यालय पत्रांक 569 दिनांक 27.11.2014 को समस्त दैनिक /दैनिक से स्थाई 59 कर्मियों की नियुक्ति निरस्त कर दी गई तथा इसकी सूचना सचिव नगर विकास, जिलाधिकारी गोण्डा को प्रेषित कर दी गई। यहां यह भी बताया जाना आवश्यक है कि पुनः वेतन भुगतान न करने का आदेश दिनांक 8.12.2014 को अध्यक्ष /अपर जिलाधिकारी गोण्डा द्वारा पत्रांक 331 दिनांक 5 मार्च 2015 को जारी किया गया, किंतु तत्कालीन अधिशासी अधिकारी द्वारा एक फर्जी पत्र विधि, नियम विरूद्ध मेमो/ न.पा. परि. गोंडा/2014 दिनांक 8.5.2015 तथा दिनांक 23 सितंबर 2014 को आधार बनाकर फर्जी तरीके से 59 कर्मचारियों का वेतन भुगतान किया जा रहा था।

पूर्व चेयरमैन
जिसे पूर्व सभासद शोएब उद्दीन के शिकायती पत्र दिनांक 20.2.2015 को फर्जी करार करते हुए निदेशक स्थानीय निकाय द्वारा पत्रांक सा. सेल/382/सुबोध रिट याचिका दिनांक 6 मार्च 2019 के द्वारा अधिशासी अधिकारी विकास सेन ईओ को निर्देशित किया गया। दिनांक 24.6.2014 के अनुक्रम में दिनांक 27.11.2014 को समस्त 59 नियुक्तियां निरस्त कर दी गईं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर निरस्त करने के बाद इन कर्मचारियों को वेतन किसके आदेश पर दिया जा रहा है? नियुक्तियां निरस्त किए जाने तथा वेतन भुगतान पर रोक के बावजूद भुगतान करते रहना क्या माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 24.6.2014 की अवमानना नहीं है? इसके साथ ही रिकवरी कराए जाने हेतु जारी नोटिस दिनांक 18 नवंबर 2015 का खुला उल्लंघन भी है। बताया जाता है कि वेतन रिकवरी की अनुमानित धनराशि 30 करोड़ रूपये से अधिक है।

क्या कहते हैं ईओ व तत्कालीन नपाप अध्यक्ष

नगर पालिका परिषद गोण्डा के अधिशासी अधिकारी विकास सेन (ईओ) ने बताया कि 59 कर्मियों का वेतन बराबर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाकी सारी बातें तो आपको पता ही है? वहीं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कमरुद्दीन का कहना है कि यह वाद उच्च न्यायालय में लंबित है।

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Author: thekhabarilal

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